Thursday, May 7, 2026
सड़क अर्जुनी

चीरचाड़ी,कोहड़िटोला नाले में रेती चोर माफियाओं का आतंक

•चीरचाड़ी-कोहड़िटोला इलाका नाले में रेत माफियाओं का आतंक

•रात के अंधेरे में हो रही बड़े पैमाने पर रेत चोरी, आखिर किसके संरक्षण में चल रहा यह काला कारोबार?

सड़क अर्जुनी : 7/5/26- सड़क अर्जुनी तहसील क्षेत्र के चीरचाड़ी और कोहड़िटोला,रेंगेपार,बामणी ,रेंगेपार, केसलवाडा, क्षेत्र के नाले में इन दिनों खुलेआम रेत चोरी का खेल जारी है। रात ढलते ही नालों में ट्रैक्टरों की आवाजाही शुरू हो जाती है और देखते ही देखते प्राकृतिक संपदा को बेरहमी से लूटा जा रहा है। हैरानी की बात यह है कि यह पूरा गोरखधंधा लंबे समय से चल रहा है, लेकिन प्रशासन अब तक मूकदर्शक बना हुआ है।

सूत्रों द्वारा प्राप्त जानकारी के अनुसार चिरचाड़ी नाले से रोजाना बड़ी मात्रा में अवैध रेत निकाली जा रही है। नियमों को ताक पर रखकर मशीनों और वाहनों के जरिए रेत का अवैध उत्खनन किया जा रहा है, जिससे पर्यावरण को गंभीर नुकसान पहुंच रहा है। शासन को लाखों रुपयों का चूना लगाया जा रहा है। न जाने यह रेत चोरी का खेल कितने सालों से चलते आ रहा है, कई जगहों पे रेत को डंपिंग करके भी रखा जाता है। और बाद में ज्यादा दाम में बेच दिया जाता है।

जनता तो अब खुले आम चर्चा करती है कि, अपनी काली कमाई के दम पर जनता में खौफ और दहशत पैदा करके अपना काला कारोबार बड़े शान से करते है ये रेती चोर। और काली कमाई से गब्बर बन के बैठे है  रेत माफिया। सरकार को लाखों रुपयों का चूना लगाने वाले इन रेती चोरों पर शासन द्वारा कड़ी कार्यवाही करने की मांग जनता कर रही है।

इस रेत चोरी के चलते बरसात के दिनों में नाले की दिशा बदलने और आसपास के खेतों को खतरा पैदा होने की आशंका भी जताई जा रही है। ग्रामीणों का आरोप है कि क्षेत्र में सक्रिय एक शातिर रेत माफिया पूरे नेटवर्क के साथ काम कर रहा है। सवाल यह उठ रहा है कि आखिर उस रेत चोर के सिर पर किसका हाथ है? बिना राजनीतिक या प्रशासनिक संरक्षण के इतनी बड़ी मात्रा में अवैध रेत परिवहन संभव नहीं माना जा रहा।

सूत्रों की मानें तो रात के समय रेत से भरे वाहन बेखौफ मुख्य मार्गों से गुजरते हैं, लेकिन कार्रवाई के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति होती है। कभी-कभार छोटे वाहन पकड़कर प्रशासन अपनी पीठ थपथपा लेता है, जबकि बड़े खिलाड़ी अब भी कानून को ठेंगा दिखा रहे हैं।

रेत चोरी के कारण शासन को लाखों रुपये के राजस्व का नुकसान हो रहा है। दूसरी ओर स्थानीय नागरिकों में प्रशासन के खिलाफ आक्रोश बढ़ता जा रहा है। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते इस अवैध कारोबार पर लगाम नहीं लगाई गई, तो आने वाले दिनों में बड़ा आंदोलन खड़ा हो सकता है।
अब देखना यह होगा कि संबंधित विभाग, तहसील प्रशासन, खनिज विभाग और पुलिस इस गंभीर मामले में कब तक कार्रवाई करते हैं, या फिर रेत माफियाओं का खेल यूं ही चलता रहेगा।

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